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1. Focusing on the opportunities of tomorrow rather than borrow over problems of yesterday.
2. I have reasons to believe that no challenge is big enough for you. The greater the challenge, the higher is your commitment to find solutions.
3. Let each one of us introspect and arrive at the best possible manner in which one can contribute to the onward journey. No role is small, no job is insignificant, it’s what we think of it and make of it. As Dr. Martin Luther King Junior said, "If you can't be a pine at the top of the hill, be a shrub in the valley. Be the best little shrub on the side of the hill. Be a bush if you can't be a tree. If you can't be a highway, just be a trail. If you can't be a sun, be a star. For it isn't by size that you win or fail. Be the best of whatever you are."
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"अत्यधिक क्रोध आने पर भी शारीरिक हिंसा का आश्रय न लेते हुए, मौखिक रूप से प्रतीकात्मक हिंसक कार्यवाही हेतु चयनित असंसदीय शब्दों के ऐसे समूह को, जिसके उच्चारण के उपरांत हृदय में धधकती क्रोध की ज्वाला शांत होती प्रतीत हो, हम गाली कहते हैं..."
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1. जब आप जीवन में सफल होते हैं तब आपके दोस्तों को पता चलता है कि आप कौन हैं; जब आप जीवन में असफल होते हैं तब आपको पता चलता है कि आपके दोस्त कौन हैं.
2. सच्चा प्रेम भूत की तरह है – चर्चा उसकी सब करते हैं, देखा किसी ने नहीं।
3. किसी व्यक्ति से यह पूछा जाना कि वह लव-मैरिज करना पसंद करेगा या अरेंज-मैरिज, कुछ वैसा ही है जैसे किसी से यह पूछा जाना कि वह ख़ुदकुशी करना पसंद करेगा या फिर क़त्ल होना ?
4. वही सबसे तेज चलता है, जो अकेला चलता है।
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जिनके चहरे पे नूर होता है,
उन्हे कितना गरूर होता है,
बे-बज़ाह नही डूबती कस्ति,
कुछ इसारा ज़रूर होता है
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ज़िक्र होता है जब क़यामत का तेरे जलवों की बात होती है
तू जो चाहे तो दिन निकलता है तू जो चाहे तो रात होती है
तुझको देखा है मेरी नज़रों ने तेरी तारीफ़ हो मगर कैसे
कि बने ये नज़र ज़ुबाँ कैसे कि बने ये ज़ुबाँ नज़र कैसे
न ज़ुबाँ को दिखाई देता है ना निग़ाहों से बात होती है
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तू चली आए मुस्कुराती हुई तो बिखर जाएं हर तरफ़ कलियाँ
तू चली जाए उठ के पहलू से तो उजड़ जाएं फूलों की गलियाँ
जिस तरफ होती है नज़र तेरी उस तरफ क़ायनात होती है
तू निग़ाहों से ना पिलाए तो अश्क़ भी पीने वाले पीते हैं
...वैसे जीने को तो तेरे बिन भी इस ज़माने में लोग जीते हैं
ज़िन्दगी तो उसी को कहते हैं जो गुज़र तेरे साथ होती है
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हरा इक पेड़ काटा जा रहा है
हमें प्रतिशत में बांटा जा रहा है
इधर दीवार ऊंची हो रही है
उधर खांई को पाटा जा रहा है
तुम्हारे हौसले बढ़ने लगे हैं
...तुम्हारा नाम छांटा जा रहा है
बता आया है कि पापा हैं घर में
उसे जोरों से डांटा जा रहा है
हमारे हाथ में हथियार देकर
हमारा हाथ काटा जा रहा है
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उसके पहलू से लग के चलते हैं
हम कहाँ टालने से टलते हैं
मैं उसी तरह तो बहलता हूँ यारों
और जिस तरह बहलते हैं
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वोह है जान अब हर एक महफ़िल की
हम भी अब घर से कम निकलते हैं
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी खुश है हम उससे जलते हैं
है अजब फ़ैसले का सहरा भी
चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं
हो रहा हूँ मैं किस तरह बर्बाद
देखने वाले हाथ मलते हैं
तुम बनो रंग, तुम बनो ख़ुशबू
हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं
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I am proud of my heart. Its played, cheated, burned and broken. But somehow still works.♥
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सर झुकाओगे तो पत्थर देवता बन जायेगा
इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जायेगा
हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम हैं
जिस तरफ भी चल दिए वो रास्ता हो जायेगा
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बैचेनी को बस बादल समझता है।
तू मुझसे दूर कैसी है, मैं तुझसे दूर कैसा हूँ
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है।